एचपीवी से सावधान

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आज H.P.V. पर लिख रही हूँ, क्यों की इस समय इस पर बहुत सी बातें हो रही है, साथ में ये बहुत कंट्रोवर्सियल यानी विवादास्पद मुद्दा भी है। खुदा नाजिर है, मैं निरपेक्ष भाव से जितना सत्य मुझे पता है, लिखने का प्रयास करुँगी।
सबसे पहले तो ये बता दूँ की H.P.V. कोई एक वाइरस नहीं है बल्कि ये 150 वाइरसों का समूह है। सारे वाइरसों से कैंसर हो ऐसा भी नहीं है। बहुत सारे सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज जैसे वार्ट्स (मास्सा) भी इससे होता है। यह भी आश्चर्य है की H.P.V. पुरुषो में भी होता है।
H.P.V. से शरीर के कुछ हिस्सों में precancerous lesions यानि की कैंसर से पहले की स्टेज के लक्षण दिखाई देते हैं। (जैसा की पहले भी बताया है कि कैंसर शरीर के किसी हिस्से में सेल के एब्नार्मल डिवीजन को कहते हैं)। H.P.V. के केस में सर्विक्स, vulva, vagina, penis, anus, mouth, और throat में कैंसर हो जाता है।

जैसा की मैंने बताया कि यह कई वाइरसों का समूह हैृृृ, इसलिए इसे हाई और लो रिस्क में डाक्टर बांटते हैं। उन ग्रुप टाइप को हम नंबर देते हैंं। जैसे लो रिस्क ग्रुप टाइप 1,2 ,63 ,27 इससे सिर्फ वार्ट्स होते हैं, वार्ट्स भी बहुत प्रकार के होते हैं जैसे कॉमन, Plantar warts, Flat warts ये सब हार्मफुल नहीं होते लेकिन हार्मफुल Genital warts की तरह द‍िखते हैंंं।
H.P.V. होता क्यों है, इस पर कोई आम सहमति नहीं है, एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर से, इन्फेक्टेड सेक्स पार्टनर से, oral, anal सेक्स से ये हो सकता है। लेकिन किसी के घर में इसकी हिस्ट्री रही हो, या जींस में कोडिंग इस तरह की हो जो कैंसर बनने में सहायक हो, तब भी इसके होने कि सम्भावना बन जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम, अर्ली एज में सेक्सुअल एक्टिविटी में आना इसका कारण हो सकता है।

सिम्टम्स कि बात करूं तो शुरुआती स्टेज में कोई सिम्टम दिखाई नहीं देते हैंं। सर्वाइकल कैंसर जो की H.P.V. में सबसे ज्यादा होता है उसमे एब्नार्मल डिस्चार्ज होना, बदबूदार डिस्चार्ज होना, इचिंग होना, बुखार रहना, एब्डोमिनल पेन होना ये सब शुरुआती लक्षण हैंंं।

अगर देश की बात करे तो सालाना 1.5 लाख मरीज डाइग्नोस होते हैं और करीब 7500 मौत सर्विकल कैंसर से होती है। ज‍ितनी मौत बिना डाइग्नोस के होती है ये तो राम जाने।
देश के ग्रामीण इलाको में भी ये कैंसर बहुत तेज़ी से फ़ैल रहा है क्योंक‍ि आदमी का बड़े शहर में जाकर कमाना और वहां से इन्फेक्टेड होकर ये बीमारी अपने पार्टनर को देना,इसके पीछे बहुत बड़ा कारण हैैै।

इसके बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सरकार ने मंजूरी दी है,बहुत से राज्य इसे अपने फ्री वैक्सीनेशन प्रोग्राम में अपना भी लिए हैंंं। यहाँ तीन तरह की वैक्सीन उपलब्ध है जिसे Gardasil, Cervarix, and Gardasil 9 कहते हैं। ये वैक्सीन H.P.V. 16 and 18 type के वाइरस से बचाव करती है जो की कैंसर के 75 % मामले के लिए रिस्पांसिबल है। वैक्सीनेशन की उम्र 9 से 26 साल ही मानी जाती है क्यों की यही स्टेज कैंसर होने के लिए ज्यादा उत्तरदायी है जबकि ये कैंसर प्रौढ़ अवस्था में भी हो सकता है। एक बात और है की ये वैक्सीन7 से 10 साल तक ही सुरक्षा करती है (ऐसा माना जाता है) इसलिए इसकी पुनः बूस्टर डोज लगवानी चाहिए।

बहुत से डाक्टरों का मानना है की इस महंगे वैक्सीनेशन से H.P.V. से उतनी सुरक्षा नहीं मिलती है। H.P.V. से headache, fever, nausea, dizziness, tiredness, diarrhea, abdominal pain जैसे साधारण साइड इफ़ेक्ट भी होते हैंंं। गर्भवती स्त्रियों पर वैक्सीनेशन का क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर शोध चल रहा है।

# ध्यान देने वाली बात ये है की अगर महिला की उम्र 9 से 14 साल है तो उसे २ डोज लगेगी, पहली डोज किसी भी दिन और दूसरी डोज 6 से 12 महीने बाद जैसा डाक्टर सजेस्ट करे।

# यदि महिला की उम्र 15 से 26 साल है तो तीन डोज लगती है,पहली किसी दिन, दूसरी डोज 2 महीने बाद,तीसरी डोज दूसरी के 6 महीने बाद

एक बात का खास ख्याल रखे, बिना अच्छे फिजिसियन या गाइनोकोलौजिस्ट से संपर्क किये, बिना उनकी रिकमंडेशन पर कोई भी वैक्सीन न लगवाएंं। ये बहुत हार्मफुल हो सकता है।

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